वायरल फीवर होने पर क्या करें?HealthPlanet

Posted on Mon 28th Nov 2022 : 16:39

इन 10 घरेलू नुस्‍खों से दें वायरल फीवर को मात
मानव शरीर का तापमान सामान्यत: 98.6 फारेनहाइट होता है, लेकिन इससे ज्यादा तापमान होना बुखार में की श्रेणी में आता है। वायरल बुखार एयरबोर्न वायरल इंफेक्शन के कारण होता है, जो हवा में फैलता है। इसमें शरीर का तापमान एकाएक बढ़ जाता है और कमजोरी महसूस होती है। कुछ सावधानियों, सामान्य दवाइयों और घरेलू नुस्खे अपनाकर बुखार (Viral Fever) को मात दी जा सकती है।

अनदेखी पड़ सकती है भारी

बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वायरल फीवर उन्हें तेजी से प्रभावित करता है। जब शरीर का तापमान 102 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा हो जाता है और कुछ घंटों तक बुखार कम नहीं होता तो अनदेखी भारी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। शरीर में चकत्ते होना, सिरदर्द होना और बदन दर्द बना रहना भी वायरल बुखार के लक्षण हैं।

वायरल बुखार के लक्षण

शरीर गर्म होना, कमजोरी महसूस होना और ठंड लगना वायरल बुखार के प्रमुख लक्षणों में है, लेकिन वायरल बुखार आने पर कई लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे-

आंखें लाल होना और जलन होना
कम या तेज बुखार होना
नाक बहना
खांसी होना
ज्वाइंट और मसल्स में दर्द होना
थकान और कमजोरी होना
चक्कर आना
छाती में जकड़न होना
घबराहट होना
टॉन्सिल्स में दर्द होना
स्किन रैशेज या चकत्ते होना
डायरिया होना

बुखार की सबसे अच्छी दवा

बुखार ठीक अलग-अलग पैथी में कई दवाईयां हैं, लेकिन पेरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, वाल्टरेन सबसे ज्यादा प्रचलित दवाइयां हैं। अधिकतर डॉक्टरों द्वारा बुखार की सबसे अच्छी दवा के रूप में इन्हीं का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इनके अलावा एसिटानिमोफेन, एडविल भी इस्तेमाल की जाती है।

बार-बार बुखार आने के कारण और उपाय

वायरल फीवर में बार-बार बुखार आता-जाता है, जिसे आवर्ती बुखार भी कहते हैं। ठंड लगना, त्वचा का गर्म होना, थकान होना, चिड़चिड़ापन होना आदि इसके लक्षण हैं। वायरस अथवा वायरल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, लापरवाही बरतना, वैक्सीनेशन, ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर रिसेप्टर एसोसिएटेड पीरियोडिक सिंड्रोम, नियोनेटल ऑनसेट मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी डिजीज, मकल वेल्स सिंड्रोम और फैमिलियल कोल्ड ऑटो इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम, एफ्थस स्टोमाटाइटिस, एडिनाइटिस आदि भी इसके कारण हो सकते हैं।

बार-बार बुखार आने से बचाव कैसे करें

खाने से पहले एवं शौचालय उपयोग के बाद साबुन से हाथ साफ करें, इसके लिए
गर्म पानी का उपयोग करें
हैंड सैनिटाइजर, एंटीबैक्टीरियल वाइप्स का उपयोग करते रहें
नाक, मुंह, आंखों को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय नाक और मुंह को अच्छी तरह ढक लें

बुखार उतारने के घरेलू उपाय

बुखार होने पर पर्याप्त आराम करें। क्योंकि शरीर बुखार से लड़ रहा होता है।
सिर, पैर के तलवों, बगल और गर्दन पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें। यह बेहद पुराना नुस्खा है और तेजी से बुखार उतारता है।
खूब पानी पिएं। इससे यूरिन के जरिए टॉक्सिन्स और इंफेक्शन निकलते हैं। पानी की कमी नहीं होती।
हल्के कपड़े पहनें। कमरे का तापमान न ज्यादा गर्म न ठंडा रखें, ताकि शरीर को ठंडक मिले।
नारियल पानी का सेवन करें क्योंकि इसमें मिनरल्स और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं।
आयुर्वेद की मान्यता के मुताबिक चंदन ठंडा होता है इसलिए बुखार में चंदन लगाने की सलाह दी जाती है।
अनार के जूस में थोड़ा सा बादाम का तेल मिलाकर पीना फायदेमंद माना जाता है।
तुलसी के पत्तों के साथ 3-4 काली मिर्च, एक चम्मच कटा अदरक उबालकर ठंडा कर घूंट-घूंट कर पीना बुखार में फायदेमंद होता है।
मूलेठी, तुलसी के पत्ते, शकर अथवा शहद मिलाकर उबालने और थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से फायदा होता है।
अजवाइन को पानी में डालकर उबालें, फिर छानकर इसे चाय की तरह गुनगुना करके पीने पर भी बुखार में राहत मिलती है।

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